रविवार, 30 नवंबर 2014

रिश्तों पर कलंक :पुरुष का पलड़ा यहाँ भी भारी



 रिश्तों पर कलंक :पुरुष का पलड़ा यहाँ भी भारी

 ''रिश्तों की ज़माने ने क्या रीत बनायी है ,
   दुश्मन है मेरी जां का लेकिन मेरा भाई है .''
पुरुष :हमेशा से यही तो शब्द है जो समाज में छाया है ,देश में छाया है और अधिक क्या कहूं पूरे संसार पर छाया है .बड़े बड़े दावे,प्रतिदावे ,गर्वोक्ति पुरुष के द्वारा की जाती है स्वयं को विश्व निर्माता और नारी को उसमे दोयम दर्ज दिया जाता है .और पुरुष के इस दावे को हाल ही की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं ने पूर्णतया साबित भी कर दिया है .हर जगह हर काम में स्वयं की श्रेष्ठता का गान गाने वाला पुरुष अपने बारे में बिलकुल सही कहता है और सही है ''हर जगह अव्वल है ''.
      २ अप्रैल २०१२ की शाम को कांधला [शामली ]में चार शिक्षिका बहनों पर तेजाबी हमला सुर्ख़ियों में था .हर ओर से इस मामले के खुलासे की मांग की जा रही थी जहाँ परिजन किसी रंजिश से इंकार कर रहे थे वहीँ पुलिस और आम जनता सभी के दिमाग में यह चल रहा था कि आखिर ऐसे ही कोई लड़कियों पर तेजाब क्यों फैंकेगा और आखिर खुलासा हो गया और ऐसा खुलासा जिसने न केवल कांधला कस्बे को शर्मसार किया बल्कि रिश्तों के नाम पर जिस सुरक्षा की एक नौ बेटियों की माँ  ख्वाब संजोये थी उस सुरक्षा को भी अपने नापाक इरादों से खाक कर डाला-
 ''हमने जिस मंजिल पे खोया एतबारे दोस्ती ,
    उसमे अक्सर लोग जाने पहचाने लगे .
हालत में कुछ ऐसा तगय्युर भी न था ,
    लेकिन वह हुआ जिसका तसव्वुर भी न था .''

   शिक्षिकाओं का बहनोई ही इस घटना का सूत्रधार निकला और जो कि स्वयं भी कांधला कस्बे का निवासी है .स्थानीय निवासी और रिश्ते में जीजा होकर बाबर ने जिस घृणित कृत्य को अंजाम दिया है उससे यह स्पष्ट है कि पुरुष कहीं भी नारी से स्वयं को पीछे नहीं देख सकता और अपने वर्चस्व को बनाये रखने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकता है और यह बात स्वयं स्वीकारी है शामली जिले के एस. पी .अब्दुल हमीद जी ने ,जिन्होंने मामले का खुलासा करते हुए कहा -''बाबर ने अपनी साली ईशा को हतोत्साहित करने के लिए ही साथी जावेद के साथ मिलकर तेजाब फैंकने की योजना बनायीं थी .''
      दूसरा मामला जो अभी हाल में काफी निंदा का विषय रहा और जिसमे बाप-बेटे के रिश्ते ही दांव पर लग गए उसका सूत्रधार भी पुरुष ही है .अरबपति बसपा नेता दीपक भरद्वाज की हत्या जो कि उनके छोटे बेटे नितेश भरद्वाज ने ही करायी ,उसी बेटे ने जिसके लिए बड़े बड़े यज्ञ हवन किये जाते हैं ,मन्नतें मांगी जाती हैं ,जश्न मनाये जाते हैं ,पितृ ऋण से मुक्ति की संकल्पना की जाती है वही बेटा ,सृष्टि नियंता पुरुष ही ऐसी घटना को जब अंजाम देता है तब आकाश में बैठे देवी देवता भी मानव की किस्मत को सराहते होंगे और कहते होंगे-
    ''सब लुट गए अरमान मेरी जान में आके,
लोगों ने मुझे लूटा है मेहमान बनाके ,
मिलते ही मुझे जिंदगी बीमार हो गयी ,
चरागरों की हर दवा बेकार हो गयी ,
जीने की तमन्ना जगी शमशान में आके .''

  यही नहीं भारतीय पुरुष आज सारे विश्व में अपने रिश्ते निभाने की काबिलियत के झंडे गाड रहे हैं .मध्य इटली के लोहा गाँव में ३९ वर्षीय कुमार राज ने पत्नी फ्रांसेस्का दी ग्रेजिया और १९ वर्षीय बेटी मार्टिना की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और ऐसा तब जबकि यह शादी उसने वहां की नागरिकता पाने को २००८ में समझौते के तहत की थी .
    पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही इतने वीर हों ,वीरांगनाएँ भी हैं हरियां के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया की बेटी सोनिया ऐसी ही बहादुर नारी हैं जिनका नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जायेगा अपने पिता सहित परिवार के ८ सदस्यों को जहर देकर मौत के घाट उतारने की वीरगाथा उन्होंने लिखी है किन्तु हाय अफ़सोस नारी ये काम भी अकेले न कर सकी और यहाँ भी पुरुष से पिछड़ गयी क्योंकि इस काम में उसने अपने पति संजीव का सहयोग लिया और उसके साथ मिलकर इस पुण्य कृत्य को अंजाम दिया .बेटी ने बाप व् परिवार के साथ जो भी किया यह हमेशा चर्चा का विषय रहेगा किन्तु सबसे ज्यादा प्रशंसा इसी बात की होगी कि नारी के मुकाबले रिश्ते निभाने में भी पुरुष का पलड़ा भारी है ,भले ही जीजा साली का रिश्ता हो ,बाप बेटे का रिश्ता हो पति पत्नी का रिश्ता हो या बाप बेटी का .इसलिए कहना होगा कि पुरुष की जय जयकार और शायद इसलिए नौशाद जी भी कह गए हैं -
   ''ऐतबार अब किसी पर होता नहीं ,
रात भर कोई बस्ती में सोता नहीं ,
काम रहजन का तो रहजनी है मगर ,
अब मुहाफिज का भी कोई भरोसा नहीं ,
उसको मिलता अगर रंगे इंसानियत ,
हाथ मेरे लहू से भिगोता नहीं .''
   शालिनी कौशिक
     [कौशल]





मंगलवार, 25 नवंबर 2014

भविष्यवाणी-स्मृति छोड़ेंगी भाजपा ?



ज्योतिषी पंडित

क्या सच होगी ज्योतिषी की भविष्यवाणी, स्मृति बनेंगी राष्ट्रपति?


स्मृति ईरानी जिस दिन से मानव संसाधन विकास मंत्री बनी हैं एक दिन भी ऐसा नहीं गया होगा जिस दिन उन्होंने कुछ किया हो और वह चर्चा का विषय न बना हो .ऐसे में वे ज्योतिषी के पास जाएँ और चर्चा से अछूती रहे ऐसा हो ही नहीं सकता और यही हुआ भी .
स्मृति ईरानी ज्योतिषी नाथुलाल व्यास के पास गयी और ज्योतिषी ने भविष्यवाणी कर दी की स्मृति राष्ट्रपति बनेंगी किन्तु इससे आगे का वे बताना भूल गए या ये कहें कि इस सम्बन्ध में चुप्पी साध गए कि इसके लिए स्मृति का भविष्य  भाजपा में नहीं है क्योंकि भाजपा न तो महिलाओं को प्रधानमंत्री बनाती है न राष्ट्रपति यहाँ तक कि वह तो महिला उम्मीदवार का समर्थन तक नहीं करती और यह हम नहीं बल्किस्वयं भाजपा का इतिहास और वर्तमान बताता है .

  Indira Priyadarshini Gandhi (Hindustani: [ˈɪnːdɪrə ˈɡaːnd̪ʱi] ( ); néeNehru; 19 November 1917 – 31 October 1984) was the third Prime Minister of India and a central figure of the Indian National Congress party. Gandhi, who served from 1966 to 1977 and then again from 1980 until her assassination in 1984, is the second-longest-serving Prime Minister of India and the only woman to hold the office.

PratibhaIndia.jpg
Pratibha Devisingh Patil (About this sound pronunciation ) (born 19 December 1934) is an Indian politician who served as the 12th President of India from 2007 to 2012; she was the first woman to hold the office. She was sworn in as President on 25 July 2007, succeeding Abdul Kalam, after defeating her rivalBhairon Singh Shekhawat. She retired from the office in July 2012. She was succeeded as President by Pranab Mukherjee.[1]
Patil is a member of the Indian National Congress (INC) and was nominated for the presidency by the governing United Progressive Alliance and Indian Left.

Lakshmi Sahgal.jpg
In 2002, four leftist parties – the Communist Party of India, the Communist Party of India (Marxist), the Revolutionary Socialist Party, and the All India Forward Bloc – nominated Sahgal as a candidate in the presidential elections. She was the sole opponent of A.P.J. Abdul Kalam, who emerged victorious.[6]
अभी तक देश की  महिला प्रधानमंत्री का गौरव श्रीमती इंदिरा गांधी जी को ही प्राप्त है और देश को महिला प्रधानमंत्री देने का श्रेय कांग्रेस को ऐसे ही देश को महिला राष्ट्रपति देने का गौरव भी कांग्रेस नेतृत्व वाले दल यू .पी.ए. को ही प्राप्त  है  श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी के रूप में देश को पहली महिला राष्ट्रपति भी भाजपा से इतर दलों द्वारा ही प्राप्त हुई हैं यही नहीं भाजपा तो इन पदों के लिए महिला उम्मीदवार का समर्थन तक नहीं करती .कैप्टेन लक्ष्मी सहगल जो राष्ट्रपति पद के लिए वाम दलों की उम्मीदवार थी उनके खिलाफ भाजपा ने अपने उम्मीदवार के रूप में ए.पी.जे.अब्दुल कलाम जी को ही बनाये रखा .और यही नहीं इस बार के चुनावों में श्रीमती सुषमा स्वराज जी जो कि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद की नैसर्गिक उम्मीदवार होनी चाहियें थी क्योंकि वे पूर्व में केंद्रीय मंत्री भी रह चुकी थी और  15 वीं लोकसभा  में पार्टी की विपक्ष की नेता भी ऐसे में ये उनका हक़ बैठता था कि वे पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद की प्रत्याशी बनें किन्तु भाजपा ने न कभी महिलाओं को आगे बढ़ाया है और न ही बढ़ाएगी ऐसे में ये ज्योतिषी  की भविष्यवाणी से साफ हो गया है कि स्मृति भविष्य में भाजपा का दामन छोड़ देंगी क्योंकि राष्ट्रपति तभी तो बनेंगी जब अन्य दल से जुड़ेंगी .
शालिनी कौशिक 
     [कौशल ]

सोमवार, 24 नवंबर 2014

''दीपक तले अँधेरा ''.

सुरक्षा व्यवस्था से नाखुश पीएम की पत्नी 
देश ने जब से नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री के रूप में पाया है तब से रोज़ नए रिकॉर्ड टूट रहे हैं कभी सबसे जबरदस्त बहुमत पाने वाली सरकार तो कभी विपक्ष के रूप में कांग्रेस की बदतर स्थिति का रिकॉर्ड और भी न जाने क्या क्या अभी बनेगा और टूटेगा किन्तु एक रिकॉर्ड जो शायद हमेशा के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ जुड़ा रहेगा और वह यह कि ये भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने अपनी पत्नी के नाम का इस्तेमाल किया केवल यहाँ के कानून के दबाव के कारण और पत्नी को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह देश के एक बेहद जनप्रिय और सभी जगह जनता से उसकी आकांक्षाओं को पूरा करने वाले प्रधानमंत्री की पत्नी हैं 
PM Narendra Modi takes Sydney by storm, promises euphoric diaspora resurgent India
Sydney: In a replay of the crowd and the euphoria at New York's Madison Square Garden, Indian Prime Minister Narendra Modi was Monday cheered lustily by an over 16,000-strong gathering of the Indian diaspora at Sydney's Allphones Arena, where he promised to fulfill their expectations of a resurgent India.
हमारे प्रधानमंत्री जी अपने वादे पूरे करने के प्रति कितने दृढ निश्चयी हैं यह उनकी पत्नी द्वारा हताशा में देश के कानून ''सूचना के अधिकार '' में यह जानकारी मांग लेने से साफ़ हो ही गया है .इसे ही शायद कहा गया है -
''दीपक तले अँधेरा ''.

शालिनी कौशिक 
   [कौशल ]

मंगलवार, 18 नवंबर 2014

इंदिरा गांधी -भारत का ध्रुवतारा

 इंदिरा प्रियदर्शिनी :भारत का ध्रुवतारा
जब ये शीर्षक मेरे मन में आया तो मन का एक कोना जो सम्पूर्ण विश्व में पुरुष सत्ता के अस्तित्व को महसूस करता है कह उठा कि यह उक्ति  तो किसी पुरुष विभूति को ही प्राप्त हो सकती है  किन्तु तभी आँखों के समक्ष प्रस्तुत हुआ वह व्यक्तित्व जिसने समस्त  विश्व में पुरुष वर्चस्व को अपनी दूरदर्शिता व् सूक्ष्म सूझ बूझ से चुनौती दे सिर झुकाने को विवश किया है .वंश बेल को बढ़ाने ,कुल का नाम रोशन करने आदि न जाने कितने ही अरमानों को पूरा करने के लिए पुत्र की ही कामना की जाती है किन्तु इंदिरा जी ऐसी पुत्री साबित हुई जिनसे न केवल एक परिवार बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र गौरवान्वित अनुभव करता है  और  इसी कारण मेरा मन उन्हें ध्रुवतारा की उपाधि से नवाज़ने का हो गया और मैंने इस पोस्ट का ये शीर्षक बना दिया क्योंकि जैसे संसार के आकाश पर ध्रुवतारा सदा चमकता रहेगा वैसे ही इंदिरा प्रियदर्शिनी  ऐसा  ध्रुवतारा थी जिनकी यशोगाथा से हमारा भारतीय आकाश सदैव दैदीप्यमान  रहेगा।
१९ नवम्बर १९१७ को इलाहाबाद के आनंद भवन में जन्म लेने वाली इंदिरा जी के लिए श्रीमती सरोजनी नायडू जी ने एक तार भेजकर कहा था -''वह भारत की नई आत्मा है .''
गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर ने उनकी शिक्षा प्राप्ति के पश्चात् शांति निकेतन से विदाई के समय नेहरु जी को पत्र में लिखा था -''हमने भारी मन से इंदिरा को  विदा  किया है .वह इस स्थान की शोभा थी  .मैंने उसे निकट से देखा है  और आपने जिस प्रकार उसका लालन पालन किया है उसकी प्रशंसा किये बिना नहीं रहा जा सकता .''   सन १९६२ में चीन ने विश्वासघात करके भारत  पर आक्रमण किया था तब देश  के कर्णधारों की स्वर्णदान की पुकार पर वह प्रथम भारतीय महिला थी जिन्होंने अपने समस्त पैतृक  आभूषणों को देश की बलिवेदी पर चढ़ा दिया था इन आभूषणों में न जाने कितनी ही जीवन की मधुरिम स्मृतियाँ  जुडी हुई थी और इन्हें संजोये इंदिरा जी कभी कभी प्रसन्न हो उठती थी .पाकिस्तान युद्ध के समय भी वे सैनिकों के उत्साहवर्धन हेतु युद्ध के अंतिम मोर्चों तक निर्भीक होकर गयी .
आज देश अग्नि -५ के संरक्षण  में अपने को सुरक्षित महसूस कर रहा है इसकी नीव में भी इंदिरा जी की भूमिका को हम सच्चे भारतीय ही महसूस कर सकते हैं .भूतपूर्व राष्ट्रपति और भारत में मिसाइल कार्यक्रम  के जनक डॉ.ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम बताते हैं -''१९८३ में केबिनेट ने ४०० करोड़ की लगत वाला एकीकृत मिसाइल कार्यक्रम स्वीकृत किया .इसके बाद १९८४ में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी डी.आर.डी एल .लैब  हैदराबाद में आई .हम उन्हें प्रैजन्टेशन दे रहे थे.सामने विश्व का मैप टंगा था .इंदिरा जी ने बीच में प्रेजेंटेशन रोक दिया और कहा -''कलाम !पूरब की तरफ का यह स्थान देखो .उन्होंने एक जगह पर हाथ रखा ,यहाँ तक पहुँचने वाली मिसाइल कब बना सकते हैं ?"जिस स्थान पर उन्होंने हाथ रखा था वह भारतीय सीमा से ५००० किलोमीटर दूर था .
इस तरह की इंदिरा जी की देश प्रेम से ओत-प्रोत घटनाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है और हम आज देश की सरजमीं पर उनके प्रयत्नों से किये गए सुधारों को स्वयं अनुभव करते है,उनके खून की एक एक बूँद हमारे देश को नित नई ऊँचाइयों पर पहुंचा रही है और आगे भी पहुंचती रहेगी.
आज का ये दिन हमारे देश के लिए पूजनीय दिवस है और इस दिन हम सभी  इंदिरा जी को श्रृद्धा  पूर्वक  नमन करते है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 16 नवंबर 2014

किसान और फसल क्या सूली ही चढ़ने के लिए ?

दैनिक जनवाणी से साभार 
 ब्रह्मा सृष्टि का निर्माण करते हैं ,विष्णु पालन करते हैं और महेश संहार करते हैं यदि इस तथ्य की गहराई में हम जाकर देखें तो भगवान विष्णु के इस कर्तव्यपालन में हमारे कृषक बराबर की भागीदारी करते हैं और इसलिए ये हमारे अन्नदाता कहे जाते हैं .हमारे द्वित्य प्रधानममंत्री माननीय लाल बहादुर शास्त्री जी ने भी इसलिए ''जय जवान -जय किसान ''का नारा बुलंद किया था .किसान का जीवन सदैव संघर्ष सहकर भी हम सभी के लिए सुख व् आंनद की वर्षा करने वाला रहा है .जिस प्रकार फलों से लदे वृक्ष हमेशा झुके रहते हैं इसी तरह हम सबका पेट भरने को हमारे किसानों के शरीर सर्वदा सर्दी-गर्मी-बारिश में खेतों में जुते रहते हैं और इस सबके बाद भी उन्हें क्या मिलता है कभी आकाश के मालिक भगवान की तरफ से अन्याय तो कभी धरती की मालिक हमारी लोकतान्त्रिक सरकार से अत्याचार और परिणाम यह होता है कि कभी हमारे किसान ख़ुदकुशी करते हैं तो कभी उनकी मेहनत अर्थात उनकी उपजाऊ फसल सूली चढ़ती है . गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश में दूसरे साल भी २७५,२८० और २९० रूपये प्रति क्विंटल ही रहने की बात सामने आते ही किसानों ने उत्तर प्रदेश में गन्ने की होली जलाई और ये तो होगा ही जब सरकार चीनी मीलों के सामने घुटने टिकेगी .एक तरफ चीनी कभी ३९ तो कभी ३८,३७ किलों के भाव तक पहुँच रही है और चीनी के उत्पादन का मूल गन्ना उपेक्षित भाव ही पा रहा है जब पडोसी राज्य हरियाणा में गन्ना ३०५ का भाव पा सकता है तो उत्तर प्रदेश में उसके साथ ये सौतेला बर्ताव क्यों ?किसानों के हित देखने का दम भरने वाली सरकार आखिर कब तक किसानों को इस तरह मरने व् फसल जलाने को विवश करती रहेगी जो कि पूर्णतया उन पर अत्याचार करने के समान है ऐसे में तो यही कहना पड़ेगा कि अगर सरकार हमारे किसानों की नहीं सुनती तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि जब तक हमारा किसान खुशहाल नहीं है हमारा देश /प्रदेश खुशहाल हो ही नहीं सकता .

शालिनी कौशिक
     [कौशल ]

शनिवार, 15 नवंबर 2014

हम कहाँ ले जा रहे बचपन को ?



एक फ़िल्मी गाना इस ओर  हम सभी का ध्यान आकर्षित करने हेतु  पर्याप्त है -
''बच्चे मन के सच्चे सारे जग की आँख के तारे ,ये वो नन्हें फूल हैं जो भगवान  को लगते प्यारे ,''

लेकिन शायद हम ये नहीं मानते क्योंकि आज जो कुछ भी हम बच्चों को दे रहे हैं वह कहीं से भी ये साबित नहीं करता एक ओर सरकार बालश्रम रोकने हेतु प्रयत्नशील है तो दूसरी ओर हम बच्चों को चोरी छिपे इसमें झोंकने में जुटे हैं.आप स्वयं आये दिन देखते हैं कि बाज़ारों में दुकानों पर ईमानदारी के नाम पर बच्चों को ही नौकर लगाने में दुकानदार तरजीह देते हैं .सड़कों पर ठेलियां ठेलते ,कबाड़ का सामान खरीदने के लिए आवाज़ लगते बच्चे ही नज़र आते हैं .




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 बच्चे अपने योन शोषण की शिकायत नहीं कर सकते इस लिए बच्चों का योन शोषण तेज़ी से बढ़ रहा है .अभी हाल में ही स्कूल बस ड्राइवर द्वारा नॉएडा में एक बच्ची के साथ ऐसे घटना प्रकाश में आई है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो आये दिन समाचार पत्र इन घटनाओं से भरे पड़े हैं .  



Vice-Principal held for beating students

इसके  साथ ही एक और दुखद  पहलू है जो बच्चों  को लेकर हमारे असंवेदनशील होने का परिचायक है और वह है विद्या के मंदिरों में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार और वह भी बच्चों के लिए भगवान् का दर्जा रखने वाले शिक्षकों द्वारा .कितने ही स्कूलों से बच्चों के साथ ऐसी घटनाएँ प्रकाश में  आती रहती हैं कि एक बार को तो ये प्रतीत होता है कि ये वास्तव में बच्चें हैं या कोई अपराधी जिनके साथ शिक्षक ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जिसे करने की इजाजत कानून अपराधियों के साथ भी नहीं देता .माँ बाप अपने बच्चों को विद्यालयों में पढने भेजते हैं किन्तु वहां इन मासूमों को  पीट कर क्या ये शिक्षक अपने कार्य के साथ न्याय कर रहे हैं .ज्यादा पिटाई बच्चों को ढीठ बनाती  है क्या वे यह नहीं जानते ?
 बचपन हमारे देश की अमूल्य निधि है और ये हम सभी का कर्तव्य है कि हम इसकी राहें  प्रशस्त करें न कि इसके लिए  आगे बढ़ने के रास्ते बंद .
                                          शालिनी कौशिक
                                               [कौशल ]

सोमवार, 10 नवंबर 2014

वाह रे गुजराती संविधान

अब वोट नहीं करनेवालों की खैर नहीं। (प्रतिनिधि चित्र)

वोट देना जरूरी करने वाला पहला राज्य बना गुजरात


 भारतीय संविधान का अनुच्छेद २१ यह  उपबंधित करता है कि ''किसी व्यक्ति को उसके प्राण और दैहिक स्वाधीनता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जायेगा ,अन्यथा नहीं .''
    इस प्रकार प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार सभी अधिकारों में श्रेष्ठ है और अनुच्छेद २१ इसी अधिकार को संरक्षण प्रदान करता है .
    यह अधिकार व्यक्ति को न केवल जीने का अधिकार देता है वरन मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार प्रदान करता है .फ्रेंसिस कोरेली बनाम भारत संघ ए.आई.आर .१९८१ एस.सी.७४६ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अनुछहद २१ के अधीन प्राण शब्द से तात्पर्य पशुवत जीवन से नहीं वरन मानव जीवन से है और इसमें मानव गरिमा के साथ जीने का अधिकार सम्मिलित है और इसी मानवीय गरिमा को मद्देनज़र रखते हुए उच्चतम न्यायालय ने प्रगति वर्गीज़ बनाम सिरिल जॉर्ज वर्गीज़ ए.आई.आर. १९९७ एस.सी.३४९ के मामले में यह अभिनिर्धारित किया कि भारतीय तलाक अधिनियम १८६९ की धारा १० ईसाई पत्नी को ऐसे व्यक्ति के साथ रहने के लिए विवश करती है जिससे वह घृणा करती है .जिसने उसके साथ क्रूरता का व्यवहार करके उसे त्याग दिया था ऐसा जीवन पशुवत जीवन है .यह ऐसे विवाह को विच्छेद करने के अधिकार को इंकार  करता है जो विवाह असुधार्य टूट गया है .विवाह विच्छेद करने के अधिकार को इंकार करना अनुच्छेद २१ के अधीन प्राप्त प्राण के अधिकार का उल्लंघन है .
   इसी तरह आज गुजरात में पारित ''गुजरात स्थानीय निकाय कानून विधेयक 2009'' है जो वर्तमान परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक को वोट डालना अनिवार्य घोषित करता है .वोट डालने का अधिकार एक ऐसा अधिकार है जो लोकतंत्र की मजबूती के लिए है किन्तु हमारे देश की परिस्थितियों में यह अनिवार्य होना गलत है क्योंकि उम्मीदवार बहुत सी बार जनता की पसंद के नहीं होते और उसका कारण भी है वह यह कि वे वोट लेने तो आते हैं किन्तु उसके बाद वे जनता के हित व् आकांक्षाओं को दरकिनार कर देते हैं ऐसे में किसी को वोट दिया जाना अनिवार्य करना ऐसे ही है जैसे उससे साँस लेने का ही अधिकार छीना जा रहा हो .यह जनता से संविधान में दिए गए जीने के अधिकार को छीनना ही है कि कोई उम्मीदवार पसंद हो या न हो वोट ज़रूर दो और ऐसा तब तो कहा ही जायेगा जब यहाँ पर उम्मीदवार को वापस बुलाने का अधिकार जनता को नहीं दिया गया हो .
   इसलिए मतदान को अनिवार्य बनाने के कर्तव्य के साथ उम्मीदवार को वापस बुलाने का अधिकार भी जनता को मिलना ही चाहिए .आखिर जनता के यदि कर्तव्य बढ़ाये जा रहे हैं तो सरकार के कर्तव्य भी तो बढ़ने चाहियें तभी तो सच्चे लोकतंत्र के दर्शन संभव होंगे .
   शालिनी कौशिक
     [कौशल ]
   [कानूनी ज्ञान ] 

शनिवार, 8 नवंबर 2014

नशा -युवा पीढ़ी और हम

''मादक पदार्थों की गिरफ्त में
घिरे हुए हमने
भी देखा है
क़र्ज़ में डूबे हुए हिंदुस्तान का ,
बिक चुके आत्म-सम्मान का ,
फलते-फूलते भ्रष्टाचार का ,
चार कदम गुलामी की ओर .''
शाप और अभिशाप दोनों समानार्थक होते हुए भी अपने में बड़ा अंतर छिपाए हुए हैं .शाप वस्तु विशेष ,समय विशेष आदि के लिए होता है ,जबकि अभिशाप जीवन भर घुन की भांति लगा रहता है .सुख प्राप्ति के लिए चिंताग्रस्त आज का मानव चेतना और चिंतन से बहुत दूर है .भय ,कायरता ,विषाद ,ग्लानि और असफलताएँ उसके मन और मस्तिष्क पर छायी रहती है .खिन्नता और क्लांति को मिटाने के लिए वह दोपहरी में प्यासे मृग की भांति कभी सिनेमाघर की ओर मुड़ता है तो कभी अन्य मन बहलाव के साधनों की ओर ,पर वहां भी उसकी चेतना उसे शांति से नहीं बैठने देती .वह दुखी होकर उठ खड़ा होता है -''क्या संसार में ऐसा कुछ नहीं जो कि तेरी चेतना को कुछ देर के लिए अचेतना में परिवर्तित कर दे ''-''मन मस्तिष्क से प्रश्न पूछता है और बिना कहे बिना उत्तर मिले पैर मुड़ जाते हैं मदिरालय की ओर ,जहाँ न शोक है और न दुःख ,जहाँ सदैव दीवाली मनाई जाती है और बसंत राग अलापे जाते हैं कुछ यूँ-
''शीशे से शीशा टकराये ,जो भी हो अंजाम ,
ओ देखो कैसे छलक छलक छल....छलकता जाये रे ...
या फिर जहाँ विषपायी शंकर का प्रसाद भांग हो ,चरस हो ,गांजा हो ,अफीम हो ,वहां वह प्रवेश करता है .
इस प्रकार नशे के द्वारा उसकी मानसिक गति शिथिल हो जाती है और रक्त संचार पर मादकता का प्रभाव हो जाता है जिससे संसार की भीतियां उससे स्वयं भयभीत होने लगती हैं  लेकिन यह क्रम जल अपनी सीमा का उल्लंघन कर रोजाना की आदत के रूप में समाज में गत्यावरोध उत्पन्न करता है तब वह समाज से तिरस्कृत  होकर  निंदा और आलोचना की वस्तु बन जाता है .
किसी नशीली वस्तु का सीमित और अल्प मात्रा में सेवन स्वास्थ्य और रोग के लिए लाभदायक होता है डाक्टर और वैध प्रायः दर्द बंद करने की जितनी औषधियां देते हैं उनमे भांग और सुरा का किसी न किसी रूप में सम्मिश्रण होता ही है .चिंतित और दुखी व्यक्ति को यदि इन पदार्थों का सहारा न हो ,तो न जाने कितने लोग नित्य आत्महत्या करने लगें क्योंकि दुःख में व्यक्ति कुछ आगा-पीछा नहीं सोचता और न असीमित दुःख उसमे सोचने की क्षमता छोड़ते हैं .
संसार में प्रत्येक वस्तु के लाभ व् हानियां होती हैं .आज मनुषय ने अपनी मूर्खता या स्वार्थवश इन मादक पदार्थों को अत्यधिक प्रयोग कर इन्हें सामजिक अभिशाप का स्वरुप प्रदान कर दिया है .प्रत्येक वस्तु जब अपनी 'अति'की अवस्था में आ जाती है तो वह अमृत के स्थान पर विष बन जाती है .नशे के चक्कर में बड़े-बड़े घरों को उजड़ते देखा है .नशे से दृव्य का अपव्यय होता है .घरवालों को समाज में अपमान का शिकार होना पड़ता है शराब आदि पीने वाले पर इस सब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता उसे अपना सब कुछ लूटकर भी नशा करना ही है .ऐसा करते हुए उसके मन में केवल एक भाव रहता है कि ---
''रूह को एक आह का हक़ है ,आँख को एक निगाह का हक़ है ,
मैं भी एक दिल लेकर आया हूँ ,मुझको भी एक गुनाह का हक़ है .''
और देखा जाये तो ये भाव उसमे केवल तभी तक रहते हैं जब तक उसके सिर पर नशा सवार रहता है ,नशा उतरने पर वे सामान्य दिखते हैं और दया के पात्र भी किन्तु क्या ऐसे लोग कभी भी किसी के आदर्श बनने योग्य होंगें ?आने वाली पीढ़ी इनसे क्या शिक्षा ग्रहण करेगी यह सभी जानते हैं .आज इन नशीले पदार्थों के कारण समाज के नैतिक स्तर का पतन हो रहा है  ,युवा इसके ज्यादा प्रभाव में आ रहे हैं ,जीवन की समस्याओं से बचने का ,तनाव से दूर रहने का ये ही एकमात्र साधन नज़र आ रहा है परिणाम क्या है , दुर्घटनाएं  रोज तेजी से हो रही हैं जिनमे एक बड़ा वहां ट्रक है जो नशे में धुत चालक द्वारा चलाया जाता है और जिसमे बैठकर चालक को अपने आगे सभी कीड़े-मकोड़े ही नज़र आते हैं जिन्हे वह नशे के आवेग में रौंदता चला जाता है ,बलात्कार जो कि सभ्य समाज के माथे पर सबसे बड़ा कलंक है अधिकतर शराब के नशे में ही हो रही हैं और देश ,समाज परिवार का भविष्य तो चौपट हो ही रहा है और नेस्तनाबूद हो रहा है हमारी युवा पीढ़ी का भविष्य और स्थिति ये है कि ऐसे में सही शिक्षा और शिक्षक सभी उन्हें गलत व् दुश्मन नज़र आते हैं और दोस्त नज़र आता है वह नशा जिसके खुमार में वह गाता है -
''दम मारो दम
मिट जाये गम
बोलो सुबह शाम
हरे कृष्णा हरे राम ''
दिल दहल जाता है अपनी युवा पीढ़ी को इस तरह विनाश की ओर बढ़ते देख और ऐसे में हमारा ही ये फ़र्ज़ बन जाता है कि हम अपने स्वाभिमान को बीच में न लाकर उन्हें भटकने से रोकें जो कि वास्तव में ये नहीं जानते कि वे जो कर रहे हैं ,उसमे केवल सत्यानाश ही है ,जहाँ जा रहे हैं वहां केवल विनाश ही विनाश है .आज इस बिगड़ती हुई स्थिति को सम्भालने के लिए आवश्यक है कि लोग इन मादक पदार्थों के सही व् गलत प्रयोग को जानने के लिए सचेत हों .आज अगर देश में इसी प्रकार इन गलत पदार्थों का प्रयोग चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बच्चे दूध की जगह कोकीन और गांजा चरस आदि मांगेंगे .
आज देश के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह स्वयं तो इस बुराई से दूर रहे ही अपने साथियों को भी इसका आदी बनने से रोके .बहुत सी बार ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति गलती से इन आदतों का शिकार हो जाता है ऐसे में हम लोग उस व्यक्ति को उसके बुराई छोड़ने के निर्णय में भी साथ न देकर उस पर व्यंग्य बाण कसते हैं जबकि ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम उसे उस बुराई को छोड़ने में सहयोग प्रदान करें .प्यार और स्नेह वह मरहम है जो किसी भी हद तक घायल के ह्रदय के घाव भर सकता है ,वह प्रकाश है जो उनकी आँखों के आगे छाये नशे के अँधेरे को दूर कर उन्हें जीवन की रौशनी प्रदान कर सकता है ,प्यार व् स्नेह में वह ताकत है जो नशे की गिरफ्त में फंसी युवा पीढ़ी को वापस ला सकती है हम सभी के साथ ,यह वह भाव है ,वह गुरु है ,वह लाठी है जो प्यार से पुचकारकर ,समझाकर और धमकाकर उसे एक नयी दिशा दे सकती है ज़िंदगी की खुशियां प्राप्त करने की .आज लोगों को निम्नलिखित पंक्ति को मन में बिठाकर नशे में फंसती युवा पीढ़ी को अपने से जोड़कर उसका इस बुराई से नाता तोड़ने के लिए कृत संकल्प होना ही होगा और उन्हें यह समझाना ही होगा -
''छोड़ दे अब टिमटिमाना भोर का तारा है तू ,
रात के यौवन सरिस ढलती रहेगी ज़िंदगी ,
इस भरम को छोड़ दे मत समझ इसको अचल ,
हिमशिला सम ताप में गलती रहेगी ज़िंदगी .''

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

सोमवार, 3 नवंबर 2014

जनांदोलन की वास्तविकता

उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम १९१६ के अधीन नगर पालिका के दो प्रकार के कर्तव्यों का उपबंध किया गया है अर्थात [१] अनिवार्य कर्तव्य तथा [२] वैवेकिक कर्तव्य .इस अधिनियम की धारा ७ [४] के अन्तर्गत यह उपबंध किया गया है कि प्रत्येक नगर पालिका का यह कर्तव्य होगा -
''सार्वजनिक सड़कों तथा स्थानों और नालियों की सफाई करना ,हानिकारक वनस्पति को हटाना और समस्त लोक उपताप का उपशमन करना ;''
किन्तु अब लगता है कि समस्त कार्य जनता के ही सिर पर पड़ने वाला है क्योंकि अब हमारे मोदी जी इसे एक जनांदोलन के रूप में देख रहे हैं और इसकी वास्तविकता को और गैर ज़रूरी बोझ को नहीं देख रहे हैं या देखते हुए भी नज़र अंदाज़ कर रहे हैं .
वास्तविकता तो ये है कि मोदी जी के आह्वान पर सलमान खान ,प्रियंका चोपड़ा जैसी हस्तियां इससे जुडी ज़रूर किन्तु जिस तरह से वे यहाँ विशिष्ट शख्सियत बनकर सफाई कर रही हैं ये केवल गंदगी को ही समझ में आ रहा है कि फ़िलहाल थोड़ी दूर रहो क्योंकि यहाँ फोटो खिंच रहा है और ज्यादा देर की तकलीफ इस कार्यक्रम से रहने वाली नहीं है और गैर ज़रूरी इसलिए कि ये कार्य जिस विभाग को कानून द्वारा सौंपा गया है यदि कानून को प्रभावी बनाते हुए उस विभाग को उसके कार्य को करने के लिए कर्तव्यबद्ध किया जाये तो इसे ऐसे नाटकों की आवश्यकता नहीं होगी जो प्रधानमंत्री जी सोशल मीडिया के जरिये कभी गन्दा स्थान दिखाते हुए फोटो अपलोड करने को कह रहे हैं ,फिर सफाई करते फोटो फिर साफ स्थान दिखाते हुए फोटो वीडियो अपलोड करने को कहते हैं .अगर प्रधानमंत्री जी अपने इस जनांदोलन की वास्तविकता ही देखना चाहते हैं तो जनता के बीच जाकर कहीं भी देख सकते हैं जहाँ स्वयं जनता और ये सरकारी विभाग ,जो इस कार्य हेतु नियुक्त हैं इस अभियान के विपरीत अस्वच्छ अभियान को जनांदोलन बनाकर उनके पवित्र अभियान को ठेंगा दिखा रहे हैं .
शालिनी कौशिक
[कानूनी ज्ञान ]
[कौशल ]

''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

   '' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट  गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारी...